अजी छोड़िए ना...
हर एक रात में, हर एक बात में वही बात हो
अजी छोड़िए ना......
इरादों,संवादों और विवादों में अब वो बात कहां
इच्छाशक्ति,दृढ़संकल्प और रिश्ते-नातो में अब वो बात कहां
अजी छोड़िए ना ....
पेड़ की छांव,प्रेमिका की बाहों और मानव की निगाहों में अब वो बात कहां
कलाकार की कलाकारी, व्यापारी और बुहारी में अब वो बात कहां।
अजी छोड़िए ना......
माँ की ममता, बाप की डांट और दोस्तों की यारी में अब वो बात कहां
आधुनिकता,आशिकता और रोजगारों की रोजगारी में अब वो बात कहां।
अजी छोड़िए ना........
नर और नारी ब्याहता और कवारी में अब वो बात कहां
नानी की सुनाई झूठी कहानी और वर्तमान की सच्ची कहानी में भी अब वो बात कहां।