Saturday, June 30, 2018

नई दुनिया में सिमटता समाज

आज का विषय बहुत ही महत्वपूर्ण भी है, अटपटा भी है जिसे सुनने पर हंसी भी आती है, और बाद में सोचने पर विवश भी करता है।चूंकि वर्तमान में कुछ ऐसी चीजें है। जिनमें समाज की भलाई व लाभ है तथा जिसका दूरगामी परिणाम सुगम होगा उसको समाज स्वीकार करने से कतराता है, बल्कि समाज उसको ज़्यादा तवज्जो देता हुआ नज़र आता है जिसका परिणाम कुछ क्षण भर का होता है। समाज में हर आयु वर्ग बच्चा, किशोर, युवा, अधेड़, बुज़ुर्ग और  लड़की, किशोरी, महिलाएं  सभी सोशल मीडिया के संपर्क में रहते है, अत्यधिक ऐसा वर्ग है जो  सोशल मीडिया पर अपनी संस्कृति समाज से जुड़ी बातों को ज़्यादा पसन्द नही करता इसके विपरीत ऐसी सामग्री जिसमें कुछ संस्कृति और समाज से हटके हो उसको अधिक पसंद किया जाता है। यही नही वतर्मान में हालात यहाँ तक पहुँच गए है कि, छोटी से छोटी चीजों को भी सोशल मीडिया पर शेयर करते है, चाहे किसी जगह घूमने का चित्र हो या किसी के मरने का सब तरह के चित्रों और चलचित्रों को  सोशल मीडिया के मंच से साझा करते है। आखिर यह कहां तक सही है कि एक ऐसा मंच जहाँ पर पूरी दुनिया से जुड़ने का मौका मिलता है लेकिन उस दुनिया में आज समाज ऐसा खो गया कि अपनी ही पहचान खोता जा रहा है।पास सब कुछ है उसके बाद भी बहुत कुछ की आस है। अपनी संस्कृति और संबंधों को बस सोशल मीडिया पर ही निभा रहा है। सोशल मीडिया की दुनिया ने अपनो से बहुत दूर कर दिया है। जो करीब है उनसे एक पल भी बात करने का समय नही निकल पाता है अन्य देश और प्रदेश के अनजान लोगों से बात करने का समय निकल जाता है।बड़ा अजीब  लगता,ये सब देखकर आखिर हम किस ओर जा रहे है। समय की रफ्तार और इस नई दुनिया के चक्कर में हम कहीं ज़्यादा दूर न निकल जाए। दूर देखने के चक्कर में पास की महत्वपूर्ण चीजे हाथ से ना निकल जाए।

जिन चित्रों को सोशल मीडिया पर साझा किया जाता है। उसे सेल्फी नाम दिया गया है। लेकिन इस सेल्फी की शुरुआत कहाँ से हुई इसका शायद ही सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले वर्ग को पता हो।
असल में सेल्फी की शुरुआत एक शराबी द्वारा की गई थी, जिसने शराब पीने के बाद मोबाइल से फ़ोटो खिंची और सोशल मीडिया पर सैंड कर दी उसके बाद से वह शराबी इतना ज्यादा लोकप्रिय हुआ कि उसको 2003 में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड की तरफ से सम्मानित किया गया। यही नहीं हर वर्ष  ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा  सेल्फी कॉम्पिटिशन होता है। जिसमें अलग अलग तरह से प्रतियोगी सेल्फी खींच कर  लाते है और वहां पर प्रतिभाग करते है।

जय हिन्द                                ( शिव कुमार)

Friday, June 29, 2018

पिछले कुछ सालों में इंसानियत हुई खत्म ।

लेख बहुत ही द्रवित और कठोर शब्दो में लिखना पड़ गया। क्योंकि पिछले कुछ सालों में मानवता का जो नंगा नाच देश के अलग अलग प्रदेशों में देखने और सुनने को मिल रहा है, उससे आत्मा पूरी तरह टूट जाती है। इंसानियत और मानवता जैसे शब्दों से विश्वाश ही उठ जाता है। ये आवाज़ मेरी नही देश के हर उस इंसान की जिनके अंदर अभी कुछ इंसानियत बची है। अन्यथा वर्तमान में हर जगह हैवानियत  के गिद्ध नज़र गड़ाए बैठे है। हर समाचार पत्र, मैगजीन,न्यूज़ चैनल, रेडियो आदि सब जगह अन्य खबरों से ज़्यादा बलात्कार,रेप, यौन शोषण,कुकर्म,हत्या की ख़बर बहुत अधिक मिलती है।कुछ दिनों से नाबालिक लड़कियों के साथ रेप और फिर उनकी हत्या की ख़बर लगातार न्यूज़ चैनल और अखबारों में देखने और पढ़ने को मिल रही। यही नही न्यूज़ चैनल और अख़बार भी इन खबरों को तवज्जो  दे रहे है। क्योंकि टीआरपी और सर्कुलेशन का  मामला है। लेकिन सभी न्यूज़ चैनल और अखबार ये क्यों भूल जाते है कि जिसकी बच्ची के साथ ये दिल दहला देनी वाली घटना हुई है, उन पर क्या बीत रही होगी। सच दिखाना गलत नही लेकिन उस सच को अपनी टीआरपी की चाशनी में भिगोकर दिखाना और  बताना कहां तक सही है,इस पर विचार करना चाहिए।
बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ, सुकन्या योजना, उज्जवला योजना, कौशल विकास योजना ऐसी अनगिनत योजना जिनको केंद्र सरकार ने लड़कियों और महिलाओं  के लिए चलाया इसी तरह हर राज्य में लड़कियों के लिए अलग अलग तरह की योजना चलाई  जाती है। लेकिन उनका कितना प्रभाव समाज पर पड़ा है, वह कितना बदलाव आया तथा कितना लाभ लड़कियों को मिला है, और कितनी इज़्ज़त इस अंधे-बहरे समाज से लड़कियों को मिल रही है। समाज में लगातार बढ़ रही इस हवस की बीमारी का कोई इलाज जरूर ढूंढना पड़ेगा। वरना भविष्य में लड़कियां पैदा करना दूर लड़की शब्द सुनने को भी कान तरस जाएंगे। इतने बड़े देश की गाथा जहां पूरा विश्व गाता है। उस देश के समाज में इतनी भयंकर बीमारी फेल रही है इसका अभी शायद बाहर किसी को कोई खबर ही नही है।  यही नही महापुरषों, वीर योद्धाओं साधु-संतों और पीर पैगम्बरों व अपनी संस्कृति से विश्वपटल पर अपनी धाक रखने वाले देश में लड़कियों की ये दशा दयनीय है।
"किसी ने ठीक कहा है जिस देश में स्त्री का सम्मान नही होता वह देश कुछ समय पश्चात टुकड़ो टुकड़ो में बंट जाता है। और उसको कोई नही बचा सकता।"

जय हिंद                             ( शिव कुमार)

मध्य प्रदेश के मंदसौर में मासूम बच्ची का बलात्कार किया गया। हैवानियत को देखकर डाक्टर भी काँप गए

मध्य प्रदेश के मंदसौर में लाखो लोग सड़कों पर है, हिन्दू बच्ची का बलात्कार इतनी बर्बरता से किया गया है की हैवानियत को देखकर डाक्टर भी काँप गए
हिन्दू बच्ची का बलात्कार : मोहम्मद इरफ़ान नाम के हैवान ने 7 साल की बच्ची को उठाया और उसका रेप किया, बच्ची को उसने मरा हुआ समझकर झाड़ियों में फेंक दिया, अभी इस बच्ची का इलाज चल रहा है वो जीवन और मौत से जूझ रही है

इस मामले में मंदसौर में लाखों लोग इस दरिन्दे को जल्द से जल्द फांसी दिए जाने की मांग को लेकर सड़क पर है, पर देश का 1 भी बुद्धिजीवी, 1 भी मीडिया वाला इस मामले में अपनी जबान खोलने को तैयार नहीं है
क्यूंकि हिन्दू बच्ची का बलात्कार मोहम्मद इरफ़ान नामक दरिन्दे ने किया है, बच्ची को मोहम्मद इरफ़ान काफिर समझकर नोच रहा था, उसने बच्ची का सिर्फ बलात्कार नहीं किया बल्कि इसने हैवानियत की हदें पार कर दी, ये बच्ची को इन्सान नहीं काफिर की बेटी समझकर नोच रहा था
बच्ची का गुप्तांग इसने पूरी तरह तबाह कर दिया, उसे दांतों से काटा, बच्ची की जान बचाने के लिए डाक्टरों को उसकी आंतें भी काटनी पड़ी है
बच्ची के मुह, गले पर इस दरिन्दे ने दांतों से काटा, जैसे ये बच्ची का मांस खा जाना चाहता हो, जिस प्रकार जंगली जानवर अपने शिकार को नोचते है इसी प्रकार ये अपने दांतों से बच्ची का गाल, कान, गर्दन नोच रहा था
जो डाक्टर बच्ची का इलाज कर रहे है वो भी बच्ची पर किये गए हैवानियत को देखकर काँप उठे है, उनका कहना है की इस बच्ची पर भीषण अत्याचार किये गए है जिनका शब्दों में बयान करना भी मुश्किल है

इस दरिन्दे को अब गिरफ्तार कर लिया गया है, पर देश में पूरी तरह सन्नाटा है, ये कोई कठुवा की असीफा का मामला नहीं है, इसलिए मीडिया बुद्धिजीवी, बॉलीवुड के सेक्युलर लोग खामोश है

जय हिंद                                       शिव कुमार

Thursday, June 28, 2018

विपक्ष को मिला तंज कसने के मौका:- नरेंद्र मोदी


PM मोदी के 41 विदेश दौरों पर अब तक खर्च हुए 355 करोड़, RTI से हुआ खुलासा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी दौरे हमेशा से विपक्षी दलों के निशाने पर रहे हैं. उनके हर दौरे पर विपक्षी दल सवाल जरूर उठाते हैं और अब आरटीआई के तहत जो खुलासा हुआ है उससे तो विपक्षी दलों के उन पर निशाना साधने का नया हथियार मिल गया है।
आरटीआई के तहत खुलासा हुआ है कि प्रधानमंत्री मोदी ने 48 महीने के अपने शासनकाल में अब तक 50 देशों से ज्यादा 41 विदेश दौरा किया है. और इस यात्रा के दौरान कुल 355 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं.
प्रधानमंत्री मोदी की विदेश दौरे को लेकर बेंगलुरु के एक आरटीआई कार्यकर्ता ने जानकारी मांगी थी. आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, अपने कार्यकाल में मोदी करीब 165 दिन देश से बाहर रहे.

7 दौरों का बिल आना बाकी
खास बात यह है कि प्रधानमंत्री ऑफिस (पीएमओ ) की वेबसाइट पर भी प्रधानमंत्री मोदी के अब तक के कार्यकाल (48 महीने) के दौरान विदेश दौरे की जानकारी उपलब्ध है. पीएमओ की वेबसाइट के अनुसार इन यात्राओं में 30 यात्रा चार्टर्ड फ्लाइट के जरिए की गई और इसका भुगतान भी कर दिया गया.
जबकि इस साल फरवरी से जून तक के 7 विदेशी दौरों का बिल अभी नहीं मिला है जिस कारण भुगतान नहीं किया गया. शेष 5 यात्राएं भारतीय वायुसेना बीबीजे
एयरक्रॉफ्ट के जरिए की गई.

मोदी का सबसे महंगा दौरा

मोदी का सबसे महंगा विदेशी दौरा अप्रैल 2015 में रहा जब वह यूरोप के बाद कनाडा के दौरे पर गए जिसमें वह फ्रांस और जर्मनी के बाद कनाडा के दौरे पर गए और इस दौरान सवा 31 करोड़ (31,25,78,000) रुपए खर्च हुए। उनका सबसे सस्ता विदेशी दौरा भूटान का रहा जब वह बतौर प्रधानमंत्री अपने पहले विदेशी दौरे पर गए. इस दौरे पर सरकार ने 2 करोड़ 45 लाख 27 हजार 465 रुपए खर्च किए। मोदी ने भूटान का दौरा 15-16  जून, 2014 को किया।

जय हिंद                                शिव कुमार

Wednesday, June 27, 2018

एथनाल,चीनी मिल और केंद्र सरकार

कुछ समय से पेट्रोल में एथनॉल बहुत कम मात्रा में मिलाया रहा था। क्योंकि सरकार ने गन्ने से एथनॉल बनाने पर रोक लगा रखी थी। लेकिन अचानक से केंद्र सरकार ने मिलों को गन्ने से एथनॉल बनाने की मंजूरी जिससे चीनी मिलों को बहुत बड़ी राहत मिली है। यही नही  मिलों में जो एथनॉल पहले 40 रु० 85 पैसे प्रति लीटर मिलता था, अब उसकी कीमत बढ़कर 43रु० 70 पैसे हो जाएगी। साथ ही वस्तु कर आयकर      सेवाकर भी लिया जाएगा। जिससे आने वाले समय में सरकार और पेट्रोल कम्पनियों को मुनाफा होगा। क्योंकि पेट्रोल और डीजल को पहले ही जीएसटी से बाहर किया हुआ है। सरकार को इससे फायदा होगा, क्योंकि 2013-14 में तेल वितरण कम्पनियों द्वारा 38 करोड़ लीटर एथनॉल की खरीद की गई थी। अब अचानक से केंद्र सरकार ने गन्ना मिलों को गन्ने के रस से एथनॉल बनाने और मूल्य वृद्धि में राहत दी है, जिससे आने वाले वर्षों में यह वृद्धि 2017-18 में 140 करोड़ लीटर बढ़ने की आशंका है। जैसे जैसे आम चुनाव की उल्टी गिनती  शुरू हो रही हैं। केंद्र सरकार एक्शन में नज़र आ रही है। देखना होगा आने वाले कुछ महीनों में  कितने बदलाव आते है। और कितने ऐसे काम जो पिछले 4 वर्षों से लटके है अब कितनी जल्दी से पूरे होते है।

जय हिंद                                      शिव कुमार     

भाजपा का मंदिर और कश्मीर 370 राग

राजनीति में चल रही उठा पटक और 370 को हटाने की जुगत कहा तक कामयाब होगी । इसका किसी को नही पता लेकिन जिस तरह से भाजपा  ने 3 साल से पीडीपी के साथ किए हुए  गठबंधन को अचानक से तोड़ना 2019 आम चुनाव की एक दस्तक का काम कर दिया है। वर्तमान में भारत की पूरी जनता और राम मंदिर का मुद्दा ले कर चुनाव जीतने वाली भाजपा की आगे की रणनीति क्या होगी, सब इसी  सोच में है। जिस तरह से खुद हिन्दू धर्म के महामंडलेश्वर और अन्य साधु संत मंदिर बनाने पर  अड़े है उसी तरह भारत का हर नागरिक कश्मीर में चल रहे अपरिणामी ग्रह युद्ध से निपटने की राह देख रहे है। जिस तरह से भाजपा ने पीडीपी पार्टी से गठबंधन तोड़ा है, लगता नही था इस तरह से कुछ होगा भाजपा को अगर गठबंधन तोड़ना था। 3 साल इंतज़ार करने की क्या जरूरत थी। जब उनको पता था कश्मीर में आज़ादी के समय  से ही कितना शांति रहती है। अब भाजपा स्वयं इस बात पर मन्त्रणा कर रही है कि आखिर 370 मुद्दा किस तरह से सुलझाया जाए,और मंदिर कैसे बने। क्योंकि जनता से जो कहा गया उसको पूरा तो करना होगा। तभी 2019 में कुछ पकड़ बन सकती है। देखना होगा कि किस तरह से भाजपा अब अपनी अगली रणनिति तैयार करती है। मोदी ,राजनाथ,अमित शाह, तीनो मिलकर क्या कुछ नया भारत की जनता को 2019 में देना चाहते है।

जय हिंद।                                शिव कुमार

नेपाल में युवाओं का तांडव

  नेपाल में युवाओं का तांडव: बेरोजगारी, भ्रष्टाचार या सुनियोजित साजिश? - एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट प्रस्तावना नेपाल में सितंबर 2025 में भड़की...