आज का विषय बहुत ही महत्वपूर्ण भी है, अटपटा भी है जिसे सुनने पर हंसी भी आती है, और बाद में सोचने पर विवश भी करता है।चूंकि वर्तमान में कुछ ऐसी चीजें है। जिनमें समाज की भलाई व लाभ है तथा जिसका दूरगामी परिणाम सुगम होगा उसको समाज स्वीकार करने से कतराता है, बल्कि समाज उसको ज़्यादा तवज्जो देता हुआ नज़र आता है जिसका परिणाम कुछ क्षण भर का होता है। समाज में हर आयु वर्ग बच्चा, किशोर, युवा, अधेड़, बुज़ुर्ग और लड़की, किशोरी, महिलाएं सभी सोशल मीडिया के संपर्क में रहते है, अत्यधिक ऐसा वर्ग है जो सोशल मीडिया पर अपनी संस्कृति समाज से जुड़ी बातों को ज़्यादा पसन्द नही करता इसके विपरीत ऐसी सामग्री जिसमें कुछ संस्कृति और समाज से हटके हो उसको अधिक पसंद किया जाता है। यही नही वतर्मान में हालात यहाँ तक पहुँच गए है कि, छोटी से छोटी चीजों को भी सोशल मीडिया पर शेयर करते है, चाहे किसी जगह घूमने का चित्र हो या किसी के मरने का सब तरह के चित्रों और चलचित्रों को सोशल मीडिया के मंच से साझा करते है। आखिर यह कहां तक सही है कि एक ऐसा मंच जहाँ पर पूरी दुनिया से जुड़ने का मौका मिलता है लेकिन उस दुनिया में आज समाज ऐसा खो गया कि अपनी ही पहचान खोता जा रहा है।पास सब कुछ है उसके बाद भी बहुत कुछ की आस है। अपनी संस्कृति और संबंधों को बस सोशल मीडिया पर ही निभा रहा है। सोशल मीडिया की दुनिया ने अपनो से बहुत दूर कर दिया है। जो करीब है उनसे एक पल भी बात करने का समय नही निकल पाता है अन्य देश और प्रदेश के अनजान लोगों से बात करने का समय निकल जाता है।बड़ा अजीब लगता,ये सब देखकर आखिर हम किस ओर जा रहे है। समय की रफ्तार और इस नई दुनिया के चक्कर में हम कहीं ज़्यादा दूर न निकल जाए। दूर देखने के चक्कर में पास की महत्वपूर्ण चीजे हाथ से ना निकल जाए।
जिन चित्रों को सोशल मीडिया पर साझा किया जाता है। उसे सेल्फी नाम दिया गया है। लेकिन इस सेल्फी की शुरुआत कहाँ से हुई इसका शायद ही सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले वर्ग को पता हो।
असल में सेल्फी की शुरुआत एक शराबी द्वारा की गई थी, जिसने शराब पीने के बाद मोबाइल से फ़ोटो खिंची और सोशल मीडिया पर सैंड कर दी उसके बाद से वह शराबी इतना ज्यादा लोकप्रिय हुआ कि उसको 2003 में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड की तरफ से सम्मानित किया गया। यही नहीं हर वर्ष ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा सेल्फी कॉम्पिटिशन होता है। जिसमें अलग अलग तरह से प्रतियोगी सेल्फी खींच कर लाते है और वहां पर प्रतिभाग करते है।
जय हिन्द ( शिव कुमार)