Tuesday, July 31, 2018

भक्ति पर भारी संस्कारो की सीख

कहते है  हर बच्चे के संस्कार घर से शुरू होते है। लेकिन कितने बच्चे उन संस्करों को अपनाकर अपने जीवन में उतारते है। और जीवन को को सफल बनाते है। संस्कार क्या होते इस बात को मेरठ के राहुल ने सच कर दिखाया। कि सबसे बड़ी भक्ति अपने बड़े बुजुर्गों की सेवा करनी होती है।
सावन के इस पावन माह में जहाँ सभी कांवड़िये अलग-अलग  राज्य से हरिद्वार पहुंचकर जल उठाते है और तथा अपने  स्थानों पर जाकर शिव का जलाभिषेक करते है। लेकिन मेरठ के रहने वाला राहुल हरिद्वार से जल की जगह अपने दादा और दादी को कलयुग का श्रवण कुमार बन कर अपने कंधों पर उठाकर कर तीर्थ दर्शन करा रहा है। राहुल के साथ उसके पापा और तीन मामा साथ है।लगातार चलते रहने से राहुल की मांसपेशियों में खिंचाव आ गया।जैसे ही राहुल अपनी दादी कश्मीरी (80)और दादा छोटे लाल (90) को ले कर शिव चौक से गुजरा तो लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गयी और राहुल को देखर उससे पूछताछ करने लगे।सभी दुआएं देने लगे कि ऐसा पौत्र भगवान सबको दे। क्योंकि वर्तमान  में दिन प्रतिदिन हो रही घटनाओं को देख कर लोगों का विश्वाश संस्करों और बड़ो के मान सम्मान से उठ से गया है। लेकिन राहुल जैसे नोजवानों को देखकर लोगों को कुछ सकून जरूर मिलता है।
एक श्रवण कुमार वह था जो पैदल चलकर अपने बूढ़े माता,पिता को तीर्थ दर्शन कराने निकला था।और वर्तमान में राहुल जो अपने दादा और दादी की खुशी के लिए उनको तीर्थ दर्शन करा रहा है।
राहुल हरिद्वार से मेरठ के औघड़नाथ मंदिर तक पैदल यात्रा करते हुए पहुंचेगा।
(प्रशासन की सुस्ती आई सामने)
प्रशासन द्वारा कांवड़ियों के लिए दवाई और किसी पानी की कोई व्यवस्था अब तक नही की गई है। कांवड़िये हरिद्वार से जल ले के जनपद के अलग अलग चोहराहो से गुजरने लगे है। लेकिन भक्तो के लिए शुद्ध जल और दवाई की कोई स्टाल अब तक प्रशासन द्वारा नही लगवाई गयी है। नगर पालिका के कर्मचारियों द्वारा कोई सफाई व्यवस्था नही की गई रुड़की रोड  हरिद्वार से कावड़ियों के आने का मुख्य मुख्य मार्ग है लेकिन सड़क पर कूड़ा फैला हुआ है। साथ ही लोकनिर्माण विभाग के कर्मचारी जल्दबाजी में सड़को के गड्ढे भरते नजर आ रहे है।  जगह जगह टूटी सड़क पर कांवड़िये पैदल नही चल पा रहे है। प्रशासन द्वारा की गई इतनी सख्ती के बावजूद विभाग अपना काम मुस्तेदी से नही कर रहे है।

(शिव कुमार)                               जय हिंद

Saturday, July 14, 2018

साहस और विश्वास से भरा परिवार


छोटे  से एक गांव  में एक ऐसा इंसान जिसको साहस और पराक्रम व खुद पर इतना विश्वास था, की उसने कड़ी महेनत कर के परिवार को रोटी खिलाई,शादी होने के बाद पत्नी ने भी बखूबी अपने पति का साथ दिया और मजदूरी कर के गुजर बसर की, कभी किसी ज़मीदार के खेत में काम कभी पशुपालन करना,कभी ईंट भट्ठों पर दिन रात महेनत करना कोई उस शख़्स से सीखे। कुछ समय बाद पति पत्नी की खुशी का कोई ठिकाना नही जब उनको सबसे पहले बेटी हुई। क्योंकि घर में लक्ष्मी का आगमन हुआ था।उसके बाद एक दो बेटे और सबसे छोटी बेटी हुई।पूरा परिवार हरा भरा हो गया। लेकिन गरीबी के कारण वह बच्चों को ठीक से नही पढा पाए। तीसरे नंबर के बेटे को कुछ 10 दर्जे पढ़ाया। परिवार की हालत को देखते हुए उस बेटे ने ज़्यादा ना पढ़ के बहनों की चिंता की और बाप के साथ मिलकर महेनत मजदूरी की, पूरा परिवार पेट भरने के लिए किसी ज़मीदार के यहां मजदूरी करता था। लेकिन बाप बच्चों को ठीक से ना पढा पाने की वजह से कई बार रात को बैठ कर रोया करता था। उसने अपने छोटे बेटे को फिर से पढ़ाने का मन बनाया। ताकि वह कुछ बन सके। लेकिन छोटे बेटे को बहनों की शादी की चिंता हो रही थी। बाप के बहुत समझाने पर उसने आगे पढ़ने का मन बनाया।लेकिन बाप के साथ काम में हाथ बंटाता रहा। एक समय परिवार हालत  ऐसी हो गई कि घर में खाने को कुछ नही रहा। उस समय उस साहसी इंसान ने किसी के आगे हाथ नही फैलाए। बल्कि किसी को ये ना लगे कि आज घर  में सब भूखे है। इसलिए "चूल्हे में आग जला के रखी" जिससे किसी को ये ना लगे कि आज रोटी नही बनी है । अब खुशी घर में आ रही थी छोटा बेटा पढ़ लिया और सरकारी नोकरी पा गया। उसके बाद सब की शादी हो गयी, माँ बाप अब बूढ़े हो चले। सबसे पहले माँ ने बच्चों को सदा खुश रहने का आशीर्वाद दिया और आखरी सांस ली। छोटा बेटा माँ को बहुत प्यार करता था। उसके बाद उन बच्चों का बाप बीमार हो गया। लेकिन घर में परिवार के बीच बैठा रहा। धीरे धीरे परिवार बड़ा बन गया बड़े बेटे और छोटे बेटे के सबसे पहले बेटो ने जन्म लिया। कुछ साल बाद फिर से बेटे हुए। लेकिन बेटी नही हुई घर में सब बेटी के पैदा होने का इंतज़ार कर रहे थे । लेकिन फिर से दोनों भाइयों के यहां बेटे पैदा हुए। उसके बाद छोटे बेटे के यहां  एक फूल सी बेटी ने जन्म लिया । और उसके बाद 2 बेटो ने । 5 बेटो पर एक बेटी लेकिन प्यार सबसे ज़्यादा बेटी को किया जाता था। दोनों परिवार में एक ही लड़की थी। जिस कारण उसको सबसे ज़्यादा प्यार करते थे। अच्छे से सब पढ़ रहे थे और दोनों परिवार में खुशी  ही खुशी थी। क्योंकि लक्ष्मी परिवार में सबकी प्यारी थी। दोनों बेटों का बाप भी बिस्तर पर लेटा हुआ  खुश रहता परिवार को इतना खुश देख कर। लेकिन अचानक से बच्चों का बूढा बाप अपनी सांसे पूरी कर गया। सांसे पूरी होने से पहले अपने दोनों बेटों को अच्छे से रहने और कभी किसी के आगे झोली ना फहलाने को कहा उसके बाद बाप ने अपनी अंतिम सांस ली। छोटा बेटे का परिवार हंसी खुशी और प्यार से रह रहा था। सब बच्चे अपनी पढ़ाई कर रहे थे जबकि दुलारी बेटी 12वीं में थी। दीपावली का त्यौहार पूरे परिवार ने अच्छे से मनाया, अगले दिन भैयादूज के त्यौहार पर सभी खुश थे , पांचों भाइयों ने सुबह नहा के अच्छे अच्छे कपड़े पहन लिए क्योंकि उनकी प्यारी सी गुड़िया उन सबको तिलक करने वाली थी। सबने अच्छे से तिलक कराया और पैसे भी दिए। लेकिन शाम होते होते अचानक से सबकी प्यारी बेटी को  बीमारी ने जकड़ लिया एक तरह से नार्मल उल्टी ,दस्त ने  उसको तोड़ दिया।पूरा परिवार परेशान हो गया। डॉ0 को बुलाया गया। डॉ0 ने दवाई दे दी लेकिन कुछ आराम नही लगा पूरा परिवार उसके पास बैठा रहा। रात बढ़ने के साथ परिवार की चिंता भी बढ़ रही थी। फिर कुछ आराम लगा तो सबको आराम मिला लेकिन 12 बजे तक हालत पूरी तरह खराब हो चुकी हो गयी थी । आनन फानन में कार किराए पर की और शहर डॉ0 के यहां ले जाने लगे लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, शहर से कुछ दूरी पर ही सबकी लाडली ने दम तोड़ दिया और परिवार के सपनो ने भी उसी के साथ दम तोड़ दिया। हंसता हुआ परिवार दुख के सागर  में डूब गया। महीनों तक परिवार के हलक तक एक अन का टुकड़ा तक  नही गया। बेटी को सबसे ज़्यादा प्यार करने वाले बाप की आंखों से आंसू नही रुक रहे थे। अपनी बेटी की हर शरारत को याद कर कर के रो रहे थे। उनको ऐसे देख सब का गला भर रहा था। माँ की हालत बहुत खराब हो चुकी थी। आंखे सूज और गला बैठ गया था। आवाज़ गले  से बाहर नही निकल रही थी अपनी बेटी को याद कर के दहाड़े मार - मार के रो रही थी। किसी तरह परिवार उस भयंकर दुख से बाहर निकला और पहले की तरह खुश रहने की कोशिश की लेकिन उस तरह से खुश नही रह पाए। अब कुछ हद तक दुख को दूर करने के लिए  काम में लगे रहते और बच्चे पढ़ते रहते। कुछ समय बाद परिवार में बड़े भाई की शादी और छोटे भाई की शादी ने घर में एक खुशी का माहौल बनाया लेकिन कहीं ना कहीं परिवार अपनी प्यारी गुड़िया की कमी को महसूस कर रहा था। परिवार में खुशी तब बढ़ी जब सबसे बड़े भाई को बेटी हुई परिवार में फिर से लक्ष्मी का आगम हुआ उसके बाद छोटे भाई के यहां भी बेटी हुई। घर में खुशी की लहर दौड़ गयी। अब परिवार में दो बेटियां आ गयी थी। सबके चेहरे  खुशी से फुले नही समा रहे थे। जीवन में कुछ अच्छा गुजरने लगा बाकी तीनों भाई पढ़ते रहे। बुरा वक्त जैसे परिवार की तरफ ही मुँह कर के बैठा हो, अचानक से एक भाई को नशे ने अपनी गिरफ्त में ले लिया उसके बाद परिवार को उसने इतना दुख दिया जो कहने सुनने से परे हो। परिवार उससे दुखी हो गया। फिर आखिर में आ कर परिवार ने उसको अपना मानने से इनकार कर दिया। लेकिन माँ बाप का मोह उसको फिर से घर ले आता। लेकिन वह अपनी हरकतों से परहेज नही करता। सबको दुखी करता रहता।
अभी जारी है ...................

(शिव कुमार)

Sunday, July 8, 2018

विपक्षी की ये कैसी राजनीति ?

पूर्व मुख्यमंत्री और सपा पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जिस समय अपने सरकारी बंगले की ऐसी स्थिति,कर के खाली करेंगे। की उस बंगले को भूत बंगला बना के छोड़ देंगे। लेकिन इससे उनको कोई फर्क नही पड़ा क्योंकि जो पैसा बंगले में लगता है वो आम जनता का होता है। जो एक आम इंसान टैक्स के रूप में जमा करता लेकिन सफेद पोश लोगो को इस बारे में कम पता होता कि आम इंसान किस तरह और ईमानदारी से टैक्स भरता है। अखिलेश यादव ने जिस दिन बंगला खाली किया उससे कई दिन पहले ही सब कुछ नियोजित किया जा चुका था। लोगों के बीच पहुँचकर अखिलेश ने आरोप भाजपा पर मढ़ दिया।  और कहा कि भाजपा मेरे खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र रचा रही है। कोई अखिलेश जी से पूछे आखिर वो क्या कर रहे है। क्या वह राजनीति नही कर रहे। यही नही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के टंकी की टोंटी को जनता को दिखा रहे है। कि हम टोंटी ले के आए है। टोंटी की जितनी कीमत होगी हम उतनी दे देंगे। अखिलेश से  पहले की बात करे तो इसी तरह से राजनाथ सिंह  ने भी सरकारी बंगले को छोड़ने से पहले बंगले को खण्डर में तब्दील कर  दिया था। अब आते है अखिलेश की बुआ यानी बसपा  पार्टी की प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अभी कुछ दिन पहले ही 7 एवेन्यू सरकारी बंगले को खाली किया। लेकिन मायावती वहां भी दलित कार्ड खेलने से नही चुकी। जिस बंगले में आज तक  मीडिया को अंदर तक जाने की इजाज़त नही थी। मायावती ने बंगला खाली करने से पहले पूरी  मीडिया को बंगले के हर एक रूम से लेकर बाथरूम और किचन तक दिखाया साथ ही उन्होंने कांशीराम और अन्य लोगो के साथ यादगार पल की कुछ तस्वीरों के बारे में मीडिया को बताया। जिस बंगले में खुद बसपा के नेता तक को जाने की इजाज़त नही थी। खुद  मायावती ने सब मिडिया को बंगले की हर चीज दिखाई आखिर जब से सप, बसपा और कांग्रेस ने एक दूसरे को आने वाले आम चुनाव में  के लिए सकारात्मक संकेत दिए। इससे पहले कांग्रेस, बसपा और सपा ने उत्तर प्रदेश के की जिलों में हुए उपचुनाव में जिस तरह से अपनी चिरप्रतिद्वंद्वी पार्टी भाजपा को हराया है। जिसमें फूलपुर,गोरखपुर,नूरपुर,और कैराना के साथ झारखंड, असम,महाराष्ट्र, पंजाब,उत्तराखंड और कर्नाटक आदि राज्यों में कुछ राज्यों को छोड़ कर सभी राज्यों में गठबंधन वाली पार्टी ने जीत दर्ज की है। लेकिन विपक्ष जिस तरह से आम चुनाव की तैयारी में लगा है उससे  भाजपा को रोक पाना नामुनकिन है। क्योंकि भाजपा का आई टी सेल बहुत मजबूत है और अंदर खाने ही देश की जनता को साधने का प्रयास किया जा रहा है।
दूसरी तरफ चुनाव को रातो रात अपने पक्ष में करने वाले भाजपा अध्यक्ष  अमित शाह बार राज्य में पहुँचकर लोगों की नसों की टटोल रहे है। अब देखना यही है की आखिर विपक्ष कितनी मजबूती से अपनी तैयारी करेगा। कितना सफल होगी इसका पता कुछ ही महीने बाद चल जाएगा।

जय हिंद                                (  शिवकुमार)

Friday, July 6, 2018

पहले अखिलेश अब योगी महिला सुरक्षित कब होगी?

उत्तर प्रदेश, जहां से सियासत अपनी राजनीतिक दिशा तय करती है। वैसे तो देश  में हर रोज छोटे छोटे चुनाव होते रहते लेकिन 2014 के आम चुनाव में देश के पटल पर सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी भाजपा। देश के 3 राज्य और कश्मीर  को छोड़ दे तो हर राज्य में भाजपा की सरकार है , और जिस प्रदेश  पर पूरी राजनीति खेली जाती है उत्तर प्रदेश में भी भजपा की सरकार है, 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में सबसे ज़्यादा विधायक जीता के  इस उम्मीद में विधानसभा में भेजे  की जनता की समस्याएं खत्म हो जाएगी लेकिन वर्तमान में बिल्कुल विपरीत हो रहा है। साथ ही  योगी आदित्यनाथ को अपने सर माथे पर बैठकर अपना मुख्यमंत्री  माना।महिला सुरक्षा को लेकर जिस तरह से योगी सरकार और केंद्र की सरकार  राम मंदिर, गो रक्षा  "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" जैसे नारे के साथ सत्ता में आई थी,  योगी सरकार को 1 साल से ज़्यादा हुआ अभी सत्ता में आए  कई बार देखने में आता है महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार व प्रशासन अपने घुटने टेक देता है। लड़कियां अपराध व कुछ अनहोनी के डर से घुट घुट सांसे लेती है, आये दिन हम देखते और सुनते है कि एक 4 और 3 साल बच्ची के साथ रेप हो गया जिसको सुनकर मानवता पूरी तरह खत्म होती नजर आती है। मानवता का हैवानियत वाला रूप देखने को तब मिलता है जब पता लगता की 8 माह की मासूम बच्ची  के साथ रेप किया गया जिसके बाद बच्ची  की दर्दनाक मौत हो गयी।कानून बन जाता हूं लेकिन कानून वाले उस कानून की धज्जियां उड़ा देते है जब पीड़ित की रिपोर्ट तक नही लिखी जाती और उसको धक्के दे थाने ,कोतवाली से  भगा दिया जाता है। योगी सरकार ने अपने भाषणों में कहा कि हम महिलाओं की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है।लेकिन कुछ समय बाद सब हवा हो गया। महिलाओं को सुरक्षित रखने के लिए एन्टी रोमियों स्कवायड चलाया गया।लेकिन खुद योगी के सरकार के विधायक का नाम उन्नाव रेप केस में आया तो महिला सुरक्षा को ले कर हुंकार भरने वाली भाजपा की पोल खुल गयी। और मामले को रफा दफा करने की जुगत लगाई जाने लगी । हाल ही के कुछ आंकडो  को देखकर सरकार से महिला सुरक्षा की कोई उम्मीद करना ऐसे होगा जैसे किसी अंधे से रास्ता पूछना। सरकार को प्रदेश  में केवल एक वर्ष हुआ और हालत सामने है।

योगी सरकार  (2017-2018)

बलात्कार     3704
छेड़खानी      987
उत्पीड़न      13392
दहेज हत्या    2223

तो वहीं पिछले सरकार यानी समाजवादी सरकार में महिला सुरक्षा को लेकर 1090  और यूपी100 जिससे पीड़ित के मामले को घर जा के ही सुलझा सके। मगर इसके लागू होने के बाद भी महिलाओं को लेकर अपराध कम नही हुए। जिसका सबसे बड़ा उदहारण बुलंदशहर में 29 जुलाई को मां-बेटी के साथ हुए गैंगरेप के बाद सरकार कानून-व्यवस्था कठघरे में आ गई थी। विपक्ष लगातार सवाल उठता रहा और इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से इस्तीफे की मांग की जाने लगी थी। मगर आज जो विपक्ष इस्तीफे की बात कर रहा था वही भी इस अपराध को कम करने पूरी तरह असफल है। अगर इन आंकड़ों को देखे तो योगी सरकार महिला सुरक्षा के मामले बहुत पीछे नज़र दिख रही है। ये आंकड़े अखिलेश सरकार के एक वर्ष के है। बाकी आप समझदार हो।

अखिलेश सरकार  (2016-2017 )

बलात्कार     2943
छेड़छानी      495
उत्पीडन       10219
दहेज हत्या    2084

जय हिंद।                                    ( शिवकुमार)

Tuesday, July 3, 2018

भयावह:- नशे का बीमार युवा हुआ बेकार

2 दिन से ब्लॉग नही लिख पाया इसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ।
पोस्ट थोड़ी बड़ी है लेकिन पढ़ना बहुत जरूरी है। साथ  ही अपना कमेंट भी जरूर लिखें।

अभी कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ राज्य की बहुत सी वीडियो देखने को मिल रही थी। मैं उनको बार बार अनदेखा कर रहा था। लेकिन जब प्रतिदिन एक साथ कई कई वीडियो आने लगी तो देखा कि बच्चे,युवा,अधेड़ उम्र के व्यक्ति अलग अलग तरह के नशे कर रहे है।यही नही एक  वीडियो में एक नोजवान युवा की नशे के करण मौत हो गई उस युवा के पास बैठी उसकी माँ अपने लाल की मौत पर रोती हुई नशे करने वाले को बोल रही कि नशा मत करना नशे ने मेरे लाल को निगल लिया। ऐसे देख मैंने कुछ सर्च किया और देखा कि स्थिति बहुत भयानक है। हरियाणा में 70 प्रतिशत नशा करने वालो की तादाद निकली जिसमें नशा करने वालो की उम्र 17 से 35 वर्ष के बीच है। दिल दहल जाता है ऐसी स्थिति  को देखकर की युवा इस तरह से नशे के इस जाल में फंसा है। हरियाणा के बाद पंजाब के बारे में खोजा तो पाया कि यहां हालात और भी बदतर और आंकड़ों ने आंखे ही खोल दी किस तरह से नशे का कारोबार पंजाब में किस तरह से फल फूल रहा है। पंजाब में 89 प्रतिशत शिक्षित युवा इस भयंकर और ज़िंदगी बर्बाद कर देने वाले नशे में चूर है । पंजाब में नशे का कारोबार माफिया और दबंग टाइप के लोगो द्वारा इतने बड़े पैमाने पर किया जा रहा है कि खुद पुलिस भी कुछ नही कर पा रही है। पंजाब में ड्रग्स पाकिस्तान बार्डर से होते हुए पंजाब बार्डर तक पहुँचता है। यही नही खुद एसटीएफ इन कामों साथ देने में जरा भी  नही कतराती है। थोड़ा और सर्च किया तो पता लगा कि बांग्लादेश की सीमा पर अफीम की खेती होती है। जो मध्यप्रदेश से सटे हुए राजस्थान के चितौडगढ़ और प्रतापगढ़ जिले से होते हुए पंजाब बार्डर तक पहुँचती है, क्योंकि राजस्थान के चितौडगढ़ और प्रतापगढ़ जिले में अफीम की सबसे ज़्यादा तस्करी की जाती है। यही नही मौत का ये समान अफगानिस्तान से होते हुए पाकिस्तान ,भारत और चीन तक पहुँचता है। दक्षिण एशिया  में भारत को  हेरोइन का सबसे बड़ा अड्डा कहा जाता है,क्योंकि भारत में हेरोइन की खपत बहुत ज़्यादा है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब में  नशे का हर वर्ष 75,000 का कारोबार होता है 
संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार आपराधिक गुट मिलकर इस कारोबार को सब जगह फैला रहे है।
एम्स के एक सर्वे में पंजाब के 10 जिलों को शामिल किया गया। इन जिलों की आबादी 2.77 करोड़ है जिसमे से लगभग 1.23 करोड़ सभी उम्र के लोग नशे को करते है।
वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट अनुसार 33 लाख लोग हर वर्ष  खतरनाक नशे करने की वजह से अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेते है।
लगभग 20 करोड़ लोग पूरे विश्व में नशे की चपेट में है।

ये हालात इस समय पंजाब हरियाणा राज्य के है। पंजाब में भिन्न भिन्न तरह के नशे जैसे अफीम,चरस,चुरा-पोस्त, गांजा,स्मेक और हेरोइन जैसे खतरनाक नशे करते है। इसके अलावा जो इन महेंगे नशों को नही खरीद पाता वह सबसे सस्ता नशा "चिस्ता" उसका नशा करता है। अफीम  का नशा पंजाब  में सबसे ज़्यादा किया जाता है। पंजाब में ये हालात पढ़े लिखे युवाओं के है आखिर युवाओं को देश की रीढ़ कहा जाता है। लेकिन यही युवा वर्तमान में देश की पीड़ बन गए है। रूह कांप जाती है ऐसे नशे करते देख देश के नोजवानों को आखिर केंद्र सरकार देश के युवाओं की नशों में फैलते इस ज़हर को दूर करने के प्रयास क्यों नही कर रही। जिस खून में देश प्रेम का जोश जनून होना चाहिए उस खून को नशा खराब कर रहा है। वर्तमान में  देश के अंदर भाजपा पार्टी की हर राज्य में सरकार है जो युवाओं को देश और हिंदुत्व की जान बताती है। अगर ये युवा इसी तरह नशे में चूर हो कर और तड़प तड़प के अपनी जान दे देंगे तो देश को कैसे सुरक्षित रखा जा सकेगा। जिनको देश के लिए जान देनी चाहिए वो कुछ पल के आनंद में आ के अपनी जीवन लीला पहले ही खत्म कर लेते है। सरकार द्वारा गो रक्षा,योग दिवस, महिला शसक्तीकरण और अन्य तरह के कार्यक्रम चलाए जा रहे है । लेकिन युवाओं को इस नशे की लत से निकालने के लिए कोई भी ऐसा कार्यक्रम नही चलाया जा रहा कि जिसको युद्ध स्तर पर  चला के युवाओं को जागरूक किया जा सके। मेरी तरफ से एक नारा "युवाओं बचाओ देश बचाओ" क्योंकि युवा ही देश की ताकत है। उनमें अपनी संस्कृति और नशे के प्रति जागरूक करने के लिए कार्यक्रम हर राज्य सरकार जिले स्तर, ब्लॉक स्तर, ग्राम स्तर पर चलाए तो कहीं ना कहीं बहुत बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा।
ये आंकड़े बहुत कुछ कहते है कि क्या हालत है इस समय देख की युवा ताकत की।

इन पंक्तियों के अनुसशरण अगर युवा करें तो बदलाव जरूर आएगा।

पोस्त ,भांग,अफीम शराब नशा उतर जाए प्रभात
     नाम खुमारी नानका चढ़ी रहे दिन रात

          (युवा बचाओ देश बचाओ)

जय हिंद                                           ( शिवकुमार)

Sunday, July 1, 2018

जीएसटी की सालगिरह कितनी सफल हुई ?

पिछले साल 1 जुलाई को ही कुछ समय के लिए मात्र जम्मू कश्मीर को छोड़ कर  पूरे देश में गुड एंड सर्विस टैक्स को लागू किया गया था। कुछ दिनों बाद जम्मू कश्मीर में भी यह लागू हो गया कर दिया गया था। जीएसटी को पूरे देश में लागू हुए आज एक वर्ष बीत गया । इसलिए देश को जीएसटी की उपलब्धियों को गिनाने के लिए दिल्ली में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया जिसको देश के रेल मंत्री पीयूष गोयल जी संबोधित करते हुए बोले कि पूरे विश्व में एक मात्र भारत ऐसा देश है कि जिसने ये हिम्मत दिखाई है पूरे भारत में एक देश एक कर की नीति अपनाई है।जिससे  देश के विकास और अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ। साथ ही एक बात और बहुत जोर जोर से बोली जा रही थी कि जो काम भाजपा ने किया आज तक किसी ने नही किया। टीवी, और सोशल मीडिया पर लाइव लगातार चल रहा था। सोशल मीडिया पर मैंने देखा कि मंत्री साहब जो बोल रहे है  कि जीएसटी से पहले 17 तरह के टेक्स दिए जा रहे थे। मगर किसी को नही पता था। साथ ही कहा कि जब जीएसटी लागू की तो 1200  वस्तुओं को उसके अंतर्गत लाया गया। लेकिन मंत्री जी ने जो महत्वपूर्ण बात थी उसके बारे में कुछ नही कहा कि आखिर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में कब तक लाया जाएगा। उनकी तारीफ और भाजपा की जय जय कार कर  रहे इन भक्तो को देश में सब कुछ ठीक ही नज़र आ रहा था और आ रहा है।  मानो सब अपनी सपनो की दुनिया में खोए हुए है जैसे सच में देश उन्नति की राह पर है। देश में सबको रोजगार मिल गया। सब समस्याओं का निराकरण हो गया। आज जीएसटी को एक वर्ष पूरा हो गया भाजपा उसकी सालगिरह मना रही है। देखना होगा देश की नैय्या कब तक पार होगी विकास अर्थव्यवस्था, राजव्यवस्था, और अन्य मूल समस्याओं का कब तक निपटारा होगा।

अगर देश के बारे इन लाइनों का उपयोग किया जाए तो अतिशयोक्ति नही होगी।

देश के हालात वर्तमान में एक बूढ़ी बीमार और  लाचार औरत की तरह है जिसके बेटे उसको स्वास्थ्य बताकर डॉ0 से बचने की कोशिश में लगे है। तथा मर्ज के बढ़ने का इंतजार कर  रहे है।

जय हिंद                                 (शिव कुमार)

नेपाल में युवाओं का तांडव

  नेपाल में युवाओं का तांडव: बेरोजगारी, भ्रष्टाचार या सुनियोजित साजिश? - एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट प्रस्तावना नेपाल में सितंबर 2025 में भड़की...