कहते है हर बच्चे के संस्कार घर से शुरू होते है। लेकिन कितने बच्चे उन संस्करों को अपनाकर अपने जीवन में उतारते है। और जीवन को को सफल बनाते है। संस्कार क्या होते इस बात को मेरठ के राहुल ने सच कर दिखाया। कि सबसे बड़ी भक्ति अपने बड़े बुजुर्गों की सेवा करनी होती है।
सावन के इस पावन माह में जहाँ सभी कांवड़िये अलग-अलग राज्य से हरिद्वार पहुंचकर जल उठाते है और तथा अपने स्थानों पर जाकर शिव का जलाभिषेक करते है। लेकिन मेरठ के रहने वाला राहुल हरिद्वार से जल की जगह अपने दादा और दादी को कलयुग का श्रवण कुमार बन कर अपने कंधों पर उठाकर कर तीर्थ दर्शन करा रहा है। राहुल के साथ उसके पापा और तीन मामा साथ है।लगातार चलते रहने से राहुल की मांसपेशियों में खिंचाव आ गया।जैसे ही राहुल अपनी दादी कश्मीरी (80)और दादा छोटे लाल (90) को ले कर शिव चौक से गुजरा तो लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गयी और राहुल को देखर उससे पूछताछ करने लगे।सभी दुआएं देने लगे कि ऐसा पौत्र भगवान सबको दे। क्योंकि वर्तमान में दिन प्रतिदिन हो रही घटनाओं को देख कर लोगों का विश्वाश संस्करों और बड़ो के मान सम्मान से उठ से गया है। लेकिन राहुल जैसे नोजवानों को देखकर लोगों को कुछ सकून जरूर मिलता है।
एक श्रवण कुमार वह था जो पैदल चलकर अपने बूढ़े माता,पिता को तीर्थ दर्शन कराने निकला था।और वर्तमान में राहुल जो अपने दादा और दादी की खुशी के लिए उनको तीर्थ दर्शन करा रहा है।
राहुल हरिद्वार से मेरठ के औघड़नाथ मंदिर तक पैदल यात्रा करते हुए पहुंचेगा।
(प्रशासन की सुस्ती आई सामने)
प्रशासन द्वारा कांवड़ियों के लिए दवाई और किसी पानी की कोई व्यवस्था अब तक नही की गई है। कांवड़िये हरिद्वार से जल ले के जनपद के अलग अलग चोहराहो से गुजरने लगे है। लेकिन भक्तो के लिए शुद्ध जल और दवाई की कोई स्टाल अब तक प्रशासन द्वारा नही लगवाई गयी है। नगर पालिका के कर्मचारियों द्वारा कोई सफाई व्यवस्था नही की गई रुड़की रोड हरिद्वार से कावड़ियों के आने का मुख्य मुख्य मार्ग है लेकिन सड़क पर कूड़ा फैला हुआ है। साथ ही लोकनिर्माण विभाग के कर्मचारी जल्दबाजी में सड़को के गड्ढे भरते नजर आ रहे है। जगह जगह टूटी सड़क पर कांवड़िये पैदल नही चल पा रहे है। प्रशासन द्वारा की गई इतनी सख्ती के बावजूद विभाग अपना काम मुस्तेदी से नही कर रहे है।
(शिव कुमार) जय हिंद
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