Tuesday, October 29, 2024

मेरे सतगुरु मुझ को....

तर्ज:- तुम्ही मेरे मंदिर।
टेक:- मेरे सतगुरु, मुझको, तू देना सहारा
 तेरे बिना मेरा नही है ठिकाना।

1. कर ले कर्म ऐसा अंत काम जाए
कर ऐसी भगती, तुझे, जो पार लगाए-2
जो मनमुख नही सदा गुरसिख में रहता
 दुनिया में उसका फिर छूटे आना जाना।
मेरे सतगुरु मुझको.....

2. ये रिश्ते ये नाते मतलब के सारे
क्यों इनमें बन्दे तू वक्त गुज़ारे-2
समय अब भी बाकी लाभ उठाना
भूल ना जाना, गुरु का खजाना
मेरे सतगुरु मुझको......

3.सूरज, चांद, तारे तुम्हे ही निहारे
 धरती, आकाश सतगुरु तुम्हें ही पुकारे
दे दो ऐसी युक्ति और दुःखों से मुक्ति
तेरे नाम का ही सतगुरु, सब गाए तराना
मेरे सतगुरु मुझको.........

4. मन और माया सदा भरमाए
 गुरु वाला इनके कभी धोखे, में न आए-2
कहे अवतार बन्दे वणज कमाना 
गुरु में सामना,भूल ना जाना
मेरे सतगुरु मुझको....... 












 

भूख ना देखे झूठी भात

भूख ना देखे झूठी भात
प्यास ना देखे पानी घाट
नींद न देखे टूटी खाट
प्यार ना देखे जात-पात।

मैं कहीं सो ना जाऊं।

1. मैं कहीं खो ना जाऊं, मैं कहीं सो ना जाऊं,
 डर लगता है...... जीवन की इस दौड़ में,आगे निकलने की होड़ में, 'कुछ' पीछे छोड़ ना आऊं,
 मैं कहीं खो ना जाऊं, मैं कहीं सो ना जाऊं।।
2. सबकी नजरों से वाकिफ़ हूँ, ज़िंदा हूँ, मरी नही हूँ, डर लगता है.....  राज किसी के खोल ना जाऊं, 
मैं कहीं खो ना जाऊं, मैं कहीं सो ना जाऊं।।
3. नादां हूँ 'पर' इतनी भी नही, हिम्मत और कुव्वत की मिसाल हूँ, 'पर' क्या सोचते हो इतनी आसानी से सब भूल जाऊं,
डर लगता है........ बेटी बन फिर से इन गिद्दों के बीच ना आऊं,
मैं कहीं खो ना जाऊं, मैं कहीं सो ना जाऊं।।
4. मुझे बचाने को, आगे बढ़ाने को, यत्न होते हज़ार, ममता की तराजु में इनको तोल ना जाऊं,  डर लगता है.....हो परेशां ये ज़माना, कुछ ऐसा बोल ना जाऊं,
मैं कहीं खो ना जाऊं, मैं कहीं सो ना जाऊं।।

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