डर लगता है...... जीवन की इस दौड़ में,आगे निकलने की होड़ में, 'कुछ' पीछे छोड़ ना आऊं,
मैं कहीं खो ना जाऊं, मैं कहीं सो ना जाऊं।।
2. सबकी नजरों से वाकिफ़ हूँ, ज़िंदा हूँ, मरी नही हूँ, डर लगता है..... राज किसी के खोल ना जाऊं,
मैं कहीं खो ना जाऊं, मैं कहीं सो ना जाऊं।।
3. नादां हूँ 'पर' इतनी भी नही, हिम्मत और कुव्वत की मिसाल हूँ, 'पर' क्या सोचते हो इतनी आसानी से सब भूल जाऊं,
डर लगता है........ बेटी बन फिर से इन गिद्दों के बीच ना आऊं,
मैं कहीं खो ना जाऊं, मैं कहीं सो ना जाऊं।।
4. मुझे बचाने को, आगे बढ़ाने को, यत्न होते हज़ार, ममता की तराजु में इनको तोल ना जाऊं, डर लगता है.....हो परेशां ये ज़माना, कुछ ऐसा बोल ना जाऊं,
मैं कहीं खो ना जाऊं, मैं कहीं सो ना जाऊं।।
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