सुदीप्तो सेन द्वारा निर्देशित धर्मांतरण और आतंक की गंदी राजनीति से ओतप्रोत यह फ़िल्म एक संकेत और इशारा करती दिखती है, कि समय के साथ संभल जाना ही बेहतर होगा। अदा शर्मा ने अपने किरदार "शालनी उन्नीकृष्णन" औऱ संवाद को बेहद ही शिद्दत के साथ निभाया। साथ ही सोनिया बिलानी ने भी "आसिफ़ा" के किरदार के साथ कोई नाइंसाफी नही की जिस तरह से ब्रेनवाश और कंवर्जन के खेल को दिखाया गया, तथ्यों को आधार बनाकर फ़िल्म का निर्माण काबिले तारीफ़ है। साथ ही भारत के सबसे साक्षरता वाले प्रदेश में इतने बड़े पैमाने पर इस तरह का खेल वास्तव में बेहद ही गंभीर स्थिति है। यह विचारणीय है, कि ऐसा क्यों? प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह और सुदीप्तो सेन ने केरल में हो रहे इस खेल से जुड़े कुछ तथ्यों को फ़िल्म के आखिर में पर्दे पर दिखाया,जिससे फ़िल्म दर्शकों के मन में घर कर गई।
साथ ही लिखे गए गीतों को अपनी सुरमई आवाज़ देकर सुनिधि चौहान और बिशाख ज्योति ने फ़िल्म में नई जान डालने का काम किया।
#यह फ़िल्म एक सबक भी है,उन हिन्दू,हिन्दू चिल्लाने वालो के लिए,कि बचपन से ही अपने बच्चों को अपने धर्म और महापुरषों के बारे में जरूर पढ़ाएं।
#कुल मुलाकर मेरे हिसाब से फ़िल्म बहुत अच्छी है।
#सभी को फ़िल्म जरूर देखनी चाहिए।
#मुद्दा 2024