Saturday, July 14, 2018

साहस और विश्वास से भरा परिवार


छोटे  से एक गांव  में एक ऐसा इंसान जिसको साहस और पराक्रम व खुद पर इतना विश्वास था, की उसने कड़ी महेनत कर के परिवार को रोटी खिलाई,शादी होने के बाद पत्नी ने भी बखूबी अपने पति का साथ दिया और मजदूरी कर के गुजर बसर की, कभी किसी ज़मीदार के खेत में काम कभी पशुपालन करना,कभी ईंट भट्ठों पर दिन रात महेनत करना कोई उस शख़्स से सीखे। कुछ समय बाद पति पत्नी की खुशी का कोई ठिकाना नही जब उनको सबसे पहले बेटी हुई। क्योंकि घर में लक्ष्मी का आगमन हुआ था।उसके बाद एक दो बेटे और सबसे छोटी बेटी हुई।पूरा परिवार हरा भरा हो गया। लेकिन गरीबी के कारण वह बच्चों को ठीक से नही पढा पाए। तीसरे नंबर के बेटे को कुछ 10 दर्जे पढ़ाया। परिवार की हालत को देखते हुए उस बेटे ने ज़्यादा ना पढ़ के बहनों की चिंता की और बाप के साथ मिलकर महेनत मजदूरी की, पूरा परिवार पेट भरने के लिए किसी ज़मीदार के यहां मजदूरी करता था। लेकिन बाप बच्चों को ठीक से ना पढा पाने की वजह से कई बार रात को बैठ कर रोया करता था। उसने अपने छोटे बेटे को फिर से पढ़ाने का मन बनाया। ताकि वह कुछ बन सके। लेकिन छोटे बेटे को बहनों की शादी की चिंता हो रही थी। बाप के बहुत समझाने पर उसने आगे पढ़ने का मन बनाया।लेकिन बाप के साथ काम में हाथ बंटाता रहा। एक समय परिवार हालत  ऐसी हो गई कि घर में खाने को कुछ नही रहा। उस समय उस साहसी इंसान ने किसी के आगे हाथ नही फैलाए। बल्कि किसी को ये ना लगे कि आज घर  में सब भूखे है। इसलिए "चूल्हे में आग जला के रखी" जिससे किसी को ये ना लगे कि आज रोटी नही बनी है । अब खुशी घर में आ रही थी छोटा बेटा पढ़ लिया और सरकारी नोकरी पा गया। उसके बाद सब की शादी हो गयी, माँ बाप अब बूढ़े हो चले। सबसे पहले माँ ने बच्चों को सदा खुश रहने का आशीर्वाद दिया और आखरी सांस ली। छोटा बेटा माँ को बहुत प्यार करता था। उसके बाद उन बच्चों का बाप बीमार हो गया। लेकिन घर में परिवार के बीच बैठा रहा। धीरे धीरे परिवार बड़ा बन गया बड़े बेटे और छोटे बेटे के सबसे पहले बेटो ने जन्म लिया। कुछ साल बाद फिर से बेटे हुए। लेकिन बेटी नही हुई घर में सब बेटी के पैदा होने का इंतज़ार कर रहे थे । लेकिन फिर से दोनों भाइयों के यहां बेटे पैदा हुए। उसके बाद छोटे बेटे के यहां  एक फूल सी बेटी ने जन्म लिया । और उसके बाद 2 बेटो ने । 5 बेटो पर एक बेटी लेकिन प्यार सबसे ज़्यादा बेटी को किया जाता था। दोनों परिवार में एक ही लड़की थी। जिस कारण उसको सबसे ज़्यादा प्यार करते थे। अच्छे से सब पढ़ रहे थे और दोनों परिवार में खुशी  ही खुशी थी। क्योंकि लक्ष्मी परिवार में सबकी प्यारी थी। दोनों बेटों का बाप भी बिस्तर पर लेटा हुआ  खुश रहता परिवार को इतना खुश देख कर। लेकिन अचानक से बच्चों का बूढा बाप अपनी सांसे पूरी कर गया। सांसे पूरी होने से पहले अपने दोनों बेटों को अच्छे से रहने और कभी किसी के आगे झोली ना फहलाने को कहा उसके बाद बाप ने अपनी अंतिम सांस ली। छोटा बेटे का परिवार हंसी खुशी और प्यार से रह रहा था। सब बच्चे अपनी पढ़ाई कर रहे थे जबकि दुलारी बेटी 12वीं में थी। दीपावली का त्यौहार पूरे परिवार ने अच्छे से मनाया, अगले दिन भैयादूज के त्यौहार पर सभी खुश थे , पांचों भाइयों ने सुबह नहा के अच्छे अच्छे कपड़े पहन लिए क्योंकि उनकी प्यारी सी गुड़िया उन सबको तिलक करने वाली थी। सबने अच्छे से तिलक कराया और पैसे भी दिए। लेकिन शाम होते होते अचानक से सबकी प्यारी बेटी को  बीमारी ने जकड़ लिया एक तरह से नार्मल उल्टी ,दस्त ने  उसको तोड़ दिया।पूरा परिवार परेशान हो गया। डॉ0 को बुलाया गया। डॉ0 ने दवाई दे दी लेकिन कुछ आराम नही लगा पूरा परिवार उसके पास बैठा रहा। रात बढ़ने के साथ परिवार की चिंता भी बढ़ रही थी। फिर कुछ आराम लगा तो सबको आराम मिला लेकिन 12 बजे तक हालत पूरी तरह खराब हो चुकी हो गयी थी । आनन फानन में कार किराए पर की और शहर डॉ0 के यहां ले जाने लगे लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, शहर से कुछ दूरी पर ही सबकी लाडली ने दम तोड़ दिया और परिवार के सपनो ने भी उसी के साथ दम तोड़ दिया। हंसता हुआ परिवार दुख के सागर  में डूब गया। महीनों तक परिवार के हलक तक एक अन का टुकड़ा तक  नही गया। बेटी को सबसे ज़्यादा प्यार करने वाले बाप की आंखों से आंसू नही रुक रहे थे। अपनी बेटी की हर शरारत को याद कर कर के रो रहे थे। उनको ऐसे देख सब का गला भर रहा था। माँ की हालत बहुत खराब हो चुकी थी। आंखे सूज और गला बैठ गया था। आवाज़ गले  से बाहर नही निकल रही थी अपनी बेटी को याद कर के दहाड़े मार - मार के रो रही थी। किसी तरह परिवार उस भयंकर दुख से बाहर निकला और पहले की तरह खुश रहने की कोशिश की लेकिन उस तरह से खुश नही रह पाए। अब कुछ हद तक दुख को दूर करने के लिए  काम में लगे रहते और बच्चे पढ़ते रहते। कुछ समय बाद परिवार में बड़े भाई की शादी और छोटे भाई की शादी ने घर में एक खुशी का माहौल बनाया लेकिन कहीं ना कहीं परिवार अपनी प्यारी गुड़िया की कमी को महसूस कर रहा था। परिवार में खुशी तब बढ़ी जब सबसे बड़े भाई को बेटी हुई परिवार में फिर से लक्ष्मी का आगम हुआ उसके बाद छोटे भाई के यहां भी बेटी हुई। घर में खुशी की लहर दौड़ गयी। अब परिवार में दो बेटियां आ गयी थी। सबके चेहरे  खुशी से फुले नही समा रहे थे। जीवन में कुछ अच्छा गुजरने लगा बाकी तीनों भाई पढ़ते रहे। बुरा वक्त जैसे परिवार की तरफ ही मुँह कर के बैठा हो, अचानक से एक भाई को नशे ने अपनी गिरफ्त में ले लिया उसके बाद परिवार को उसने इतना दुख दिया जो कहने सुनने से परे हो। परिवार उससे दुखी हो गया। फिर आखिर में आ कर परिवार ने उसको अपना मानने से इनकार कर दिया। लेकिन माँ बाप का मोह उसको फिर से घर ले आता। लेकिन वह अपनी हरकतों से परहेज नही करता। सबको दुखी करता रहता।
अभी जारी है ...................

(शिव कुमार)

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