कुछ समय से पेट्रोल में एथनॉल बहुत कम मात्रा में मिलाया रहा था। क्योंकि सरकार ने गन्ने से एथनॉल बनाने पर रोक लगा रखी थी। लेकिन अचानक से केंद्र सरकार ने मिलों को गन्ने से एथनॉल बनाने की मंजूरी जिससे चीनी मिलों को बहुत बड़ी राहत मिली है। यही नही मिलों में जो एथनॉल पहले 40 रु० 85 पैसे प्रति लीटर मिलता था, अब उसकी कीमत बढ़कर 43रु० 70 पैसे हो जाएगी। साथ ही वस्तु कर आयकर सेवाकर भी लिया जाएगा। जिससे आने वाले समय में सरकार और पेट्रोल कम्पनियों को मुनाफा होगा। क्योंकि पेट्रोल और डीजल को पहले ही जीएसटी से बाहर किया हुआ है। सरकार को इससे फायदा होगा, क्योंकि 2013-14 में तेल वितरण कम्पनियों द्वारा 38 करोड़ लीटर एथनॉल की खरीद की गई थी। अब अचानक से केंद्र सरकार ने गन्ना मिलों को गन्ने के रस से एथनॉल बनाने और मूल्य वृद्धि में राहत दी है, जिससे आने वाले वर्षों में यह वृद्धि 2017-18 में 140 करोड़ लीटर बढ़ने की आशंका है। जैसे जैसे आम चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो रही हैं। केंद्र सरकार एक्शन में नज़र आ रही है। देखना होगा आने वाले कुछ महीनों में कितने बदलाव आते है। और कितने ऐसे काम जो पिछले 4 वर्षों से लटके है अब कितनी जल्दी से पूरे होते है।
जय हिंद शिव कुमार
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