Friday, August 10, 2018

मुफ़लिसी के दौर में खुशी के पल खोजने की कोशिश करता नन्हा बचपन।


गरीबी किसी से पूछकर नही आती और ना ही भगवान किसी  इंसान को गरीब बनाता है।लेकिन इंसान खुद अपनी किस्मत लिखता है। जैसा कर्म करेगा वैसा ही फल मिलेगा।
ऐसे ही मुज़फ्फरनगर के महावीर चौक पर बने फव्वारे पर नन्हा बचपन ख़ुशी के कुछ पल खोजने की नाकाम कोशिश करता हुआ नजर आया। ब्रह्स्पतिवार को पूरा मुज़फ्फरनगर जहां शिव का जलाभिषेक करने लगे थे। ठीक उसी समय कुछ नन्हे बच्चे महावीर चौक पर बने बन्द फव्वारे में भरे पानी के बीच नहा कर खुशी का इजहार करते हुए नजर आए। उनके लिए सब दिन एक जैसे होते इन बच्चों को किसी के त्यौहार से कोई मतलब नही है,इनको दो वक्त का खाना मिल जाए तो इनकी ईद, दीवाली उसी दिन बन जाती है। अलग-अलग जगह पर जा के मांगना और अपना पेट भरना यही काम रोज करते  है। लेकिन कभी अपने कर्म से विमुख नही होते है।
शायद कभी स्विमिंग पूल का ख्वाब पूरा होगा या नही इस बात को भूला के महीनों से बंद पड़े उस फव्वारे को ही अपने सपनों का स्विमिंग पूल बना लिया। नहाते समय उन बच्चों के चेहरों पर ज़रा भी सिकन नही बल्कि ख़ुशी झलक रही थी। उनको नहाते देख कर अपने देश की गरीबी पर सोच हुआ कि आखिर भगवान ने सच में इनको गरीब बनाया या फिर इनके ऐसे कर्मो की वजह से ये सब हुआ। जो भी हुआ हो लेकिन बच्चों को ऐसे नहाते देख और उनके चेहरो पर खुशी देखते ही बनती थी।
(शिव कुमार)

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